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कर्मयोग

25 लेख

आलेख

अर्जुन का शिष्यत्व ही गीता का निमित्त

कहते हैं कि गीता समझनी है तो अर्जुन के भाव में आना होगा। अर्थात युद्धभूमि में भी विस्तृत स्वाध्याय करने को तत्पर होना होगा।…

11 July 2023 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

शिष्य के शिष्यत्व से ही है गुरु की महिमा

गुरु की गुरुता शिष्य की श्रद्धा से है इसलिए हम अपने मन में शिष्यत्व को धारण किये रहें। आज यदि सारे शिक्षक अपने मन…

3 July 2023 Mukul Kanitkar
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चरित्र

अनावृत्त करें स्वामी विवेकानंद के अनुपम उपहार

समृद्धि व संस्कृति की समान उपासना करनेवाले विश्वगुरु भारत का स्वप्न यदि हम साकार करना चाहते हैं तो स्वामीजी के आवृत्त उपहारों का अनुसंधान…

13 January 2023 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

श्रीकृष्ण का शिष्यत्व ग्रहण कर स्वाध्याय करें।

अर्जुन बनेंगे तभी गीता समझेंगे। जब तक शिष्यत्व नहीं लेते तब तक अर्जुन नहीं बनते। धृतराष्ट्र का मामकाः जब अर्जुन में प्रवेश कर गया…

3 December 2022 Mukul Kanitkar
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आलेख

बुद्धि का परिशोधन मेधा से प्रज्ञा तक

महिष मानव के भीतर अवशिष्ट पशुत्व का प्रतीक है सब देवताओं के तेजांश से संगठित माँ कात्यायनी ही उस पर आरूढ़ हो उसका मर्दन…

1 October 2022 Mukul Kanitkar
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आलेख

एकाग्रता और भाव विस्तार से ही अभय

सामन्यतः मन के रूप में सम्बोधित अन्तःकरण में चार करण (instruments) आते है -मन, बुद्धि, चित्त और अहं। एक ही आंतरिक व्यवस्था जिसे गीता…

30 September 2022 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

आइये अपने भीतर के अर्जुन को जगाएं !

धर्म अधर्म का युद्ध शाश्वत है| यह महाभारत हर काल में लड़ा जाता है | व्यक्तिकेंद्रित विचार करनेवाले स्वार्थी अपने निजी हितों, स्वार्थों के…

2 December 2014 Mukul Kanitkar
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