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कर्मयोग 9: प्रश्नों का गीता में बड़ा महत्व है। अर्जुन के प्रश्नों से ही गीता का प्रवाह आगे बढ़ता है। अन्यथा तो दूसरे अध्याय…
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कर्मयोग 9: प्रश्नों का गीता में बड़ा महत्व है। अर्जुन के प्रश्नों से ही गीता का प्रवाह आगे बढ़ता है। अन्यथा तो दूसरे अध्याय…
पूरा लेख पढ़ेंकर्मयोग 8: आठवी कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची ने पत्र में पूछा, ‘‘भैया ये आसक्ति क्या होती है?’’ सुसंस्कृत परिवार था। घर में पाठ,…
पूरा लेख पढ़ेंकर्मयोग 7: स्वधर्म पर आधारित कर्म से ही जीवन में परिपूर्णता एवं संतुष्टि प्राप्त हो सकती है। यही गीता का संदेश है। इसको जीवन…
पूरा लेख पढ़ेंकर्मयोग 6: चंगु की अच्छी खासी नौकरी है, ठीक ठाक कमाई भी। स्नेहमय, सुखी, समझदार, सहयोगी परिवार; तेजस्वी, प्रखर बुद्धि, आज्ञाकारी पुत्र भी है।…
पूरा लेख पढ़ेंपिछले कुछ दिनों में दो प्रसंग सामने आये। तीन अच्छे रचनाकारों को नियमित लिखने के लिये कहा तो तीनों अपनी व्यस्तता का वास्ता दिया।…
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