रूप भी कार्य का साधन
पवित्र मन ही शरीर में सौन्दर्य से अभिव्यक्त होता है। स्वार्थ के स्थान पर देशहित का विचार भी भाव और वचन दोनों में स्पष्टता…
पूरा लेख पढ़ेंविषय
26 लेख
पवित्र मन ही शरीर में सौन्दर्य से अभिव्यक्त होता है। स्वार्थ के स्थान पर देशहित का विचार भी भाव और वचन दोनों में स्पष्टता…
पूरा लेख पढ़ें
वीरता मानसिक क्षमता है उसका सर्वोत्तम रूप महावीर है। विपरीत स्थिति में भी व्यवहारकुशलता से मार्ग निकालने की बौद्धिक योग्यता का नाम विक्रम और…
पूरा लेख पढ़ें
हमारा प्रत्येक परिचय ही हमें दायित्व देता है। जैसे हम मनुष्य हैं तो अपेक्षा है कि मानवता का आचरण करें। भारतीय हैं तो हमारा…
पूरा लेख पढ़ें
आदर्श कार्यकर्ता सदैव सीखता रहता है। वह जानता है पूर्णता के लिए सदैव आगे बढ़ते रहना है। इसलिए उसे विनम्र होना पड़ता है। अपनी…
पूरा लेख पढ़ेंसंगठनात्मक कार्य से सक्रिय निवृत्ति सर्वाधिक उल्लेखनीय थी। पूरा सम्पर्क तोड़े बिना उन्होंने उलझना पूर्ण बंद कर दिया। यह आश्चर्यजनक था कि बिना कण…
पूरा लेख पढ़ेंWords of Parampoojya Sarasanghachalak made complete sense. When given responsibility of sah sangathan mantri in 2012 under the mentorship of Vinayakrao who was Sangathan…
पूरा लेख पढ़ेंसमृद्धि व संस्कृति की समान उपासना करनेवाले विश्वगुरु भारत का स्वप्न यदि हम साकार करना चाहते हैं तो स्वामीजी के आवृत्त उपहारों का अनुसंधान…
पूरा लेख पढ़ेंTo The Fourth Of July by Swami Vivekananda (From The Complete Works of Swami Vivekananda, Vol5 Page 440. It is well known that Swami…
पूरा लेख पढ़ेंआज विज्ञान भी किसी सम्प्रदाय से कम नहीं रहा है। वैज्ञानिक अपनी अधूरी मान्यताओं को भी किसी साम्प्रदायिक विश्वास के समान ही सब पर…
पूरा लेख पढ़ेंराम अर्थात मूर्तिमान धर्म। वाल्मिकी रामायण में कहा है – रामो विग्रहवान धर्म! जीवन के प्रत्येक समय में श्रीराम ने धर्म का पालन किया।…
पूरा लेख पढ़ें