विषय

कविता

8 लेख

कविता

रंगोत्सव नहीं होली है धर्मोत्सव

होलिका है धर्म रक्षा का आत्मोत्सव वसंत के आह्लाद का आनंदोत्सव फाग के राग का संगीतमय स्वरोत्सव समरस समाज का एकात्म भावोत्सव ऋतुपरिवर्तन का…

4 March 2026 Mukul Kanitkar
पूरा लेख पढ़ें
कविता

फिर फूंको पांचजन्य ! फिर सुनाओ गीता !!

आज भ्रमित अर्जुन विषादग्रस्त नहीं आक्रोशित है। तमस नहीं आज रजस का प्रकोप है। अपने में सिमटा सकुचा, परास्त नहीं आज का अर्जुन, संख्याबल…

24 December 2012 Mukul Kanitkar
पूरा लेख पढ़ें