रंगोत्सव नहीं होली है धर्मोत्सव
होलिका है धर्म रक्षा का आत्मोत्सव वसंत के आह्लाद का आनंदोत्सव फाग के राग का संगीतमय स्वरोत्सव समरस समाज का एकात्म भावोत्सव ऋतुपरिवर्तन का…
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होलिका है धर्म रक्षा का आत्मोत्सव वसंत के आह्लाद का आनंदोत्सव फाग के राग का संगीतमय स्वरोत्सव समरस समाज का एकात्म भावोत्सव ऋतुपरिवर्तन का…
पूरा लेख पढ़ेंसतयुग में ना राम थे ना रावण दोनों अवतरित हुए त्रेता में! कलियुग में भी दोनों नहीं हैं। ना राम जैसा सत्व है घनीभूत…
पूरा लेख पढ़ेंआज भ्रमित अर्जुन विषादग्रस्त नहीं आक्रोशित है। तमस नहीं आज रजस का प्रकोप है। अपने में सिमटा सकुचा, परास्त नहीं आज का अर्जुन, संख्याबल…
पूरा लेख पढ़ेंकल तक अनन्त के दर्शन से थे जो विस्मित ! अब आत्मबल विहीन क्यों हो गये शंकित? विस्मयादि बोध ‘!’ के स्थान पर प्रश्नचिह्न…
पूरा लेख पढ़ेंIt was beginning of Monsoon in 1989 when we went to Ratnagiri in western coast of Maharashtra. My younger brother Makarand had completed his…
पूरा लेख पढ़ेंएकादशी की सुबह दशहरा मैदान में जले रावण की राख समेटते बूढ़ा वाल्मीकी पोते से बोला सदियों से हर बार रावण जलता है और…
पूरा लेख पढ़ेंभय अथवा भयंकर वेदना से जब उठती है मन के गहरे तल से चित्कार !! तो उस स्वर में कोई तारतम्य कैसे हो सकता…
पूरा लेख पढ़ेंसत्य का पथ कहते है कि बडा कन्ट्काकीर्ण होता है सत्य का पथ ! पर अनुभव तो है ये कि सत्यपथ सदाही मनोहर होता…
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