स्वभाव, स्वधर्म और स्वकर्म द्वारा ही स्वतंत्र का निर्माण
कूष्माण्डा के अण्ड में पूरा ब्रह्मांड विद्यमान है। पूरा अस्तित्व ही एक विराट पुरुष है। राष्ट्र उसके अंग हैं। राष्ट्र का भी जैविक विराट…
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कूष्माण्डा के अण्ड में पूरा ब्रह्मांड विद्यमान है। पूरा अस्तित्व ही एक विराट पुरुष है। राष्ट्र उसके अंग हैं। राष्ट्र का भी जैविक विराट…
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‘नित्य नूतन, चिर पुरातन’ यह विशेषण इस कालसुसंगत जीवन पद्धति के लिए अत्यंत समर्पक है। शाश्वत, सनातन, प्राकृतिक, शास्त्रीय मानवी सिद्धांतों का युगानुकूल और…
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इस नवरात्रि उत्तरापथ की संकल्प यात्रा में इस विचार यजन पर स्वाध्याय करते हैं। एकात्म और समग्र भाव की सामयिक प्रस्तुति तथा विघटनकारी बलों…
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सामान्य युग (Common Era-CE) के पूर्व से भारत में आए प्रवासियों ने जो यात्रा वर्णन लिखे हैं उनके अध्ययन से हम पाते हैं कि…
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A paradigm shift in the international affairs resulted in the space launch must now be emulated as a quantum jump in the economic field.…
पूरा लेख पढ़ेंजब तक हम सनातन आर्थिक प्रतिमान पर व्यवहार करते रहे तब तक भारत सुसंस्कृत होने के साथ ही समृद्ध भी था। विदेशी शासकों द्वारा…
पूरा लेख पढ़ेंशुद्ध सात्विक प्रेम कार्य का आधार होने से स्नेहमय, आत्मीय, पारिवारिक संबंध तो कार्यकर्ताओं में निश्चित ही होते हैं। कार्यकर्ता जुड़ता भी किसी व्यक्ति…
पूरा लेख पढ़ेंसंगठनात्मक कार्य से सक्रिय निवृत्ति सर्वाधिक उल्लेखनीय थी। पूरा सम्पर्क तोड़े बिना उन्होंने उलझना पूर्ण बंद कर दिया। यह आश्चर्यजनक था कि बिना कण…
पूरा लेख पढ़ेंकहते हैं कि गीता समझनी है तो अर्जुन के भाव में आना होगा। अर्थात युद्धभूमि में भी विस्तृत स्वाध्याय करने को तत्पर होना होगा।…
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गुरु की गुरुता शिष्य की श्रद्धा से है इसलिए हम अपने मन में शिष्यत्व को धारण किये रहें। आज यदि सारे शिक्षक अपने मन…
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