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भारत माता

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आलेख

एकाग्रता और भाव विस्तार से ही अभय

सामन्यतः मन के रूप में सम्बोधित अन्तःकरण में चार करण (instruments) आते है -मन, बुद्धि, चित्त और अहं। एक ही आंतरिक व्यवस्था जिसे गीता…

30 September 2022 Mukul Kanitkar
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स्वावलम्बी युवा! समर्थ भारत!!

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर को किसी युवा ने पूछा कि आप युवा किस कहते है? भाषा शुद्धिकरण के आन्दोलन को चलाते हुए भारतीय भाषाओं…

22 December 2013 Mukul Kanitkar
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चुनावी रणभूमी मे राष्ट्रवाद का शंखनाद

चुनाव लोकतंत्र का महोत्सव है। वर्तमान में चुनाव आयोग द्वारा डाले गये कठोर निर्बंधों के कारण इस महोत्सव का उत्साह कुछ धीमा पड गया दिखता…

29 November 2013 Mukul Kanitkar
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दिग्विजय से पाएं विश्वविजय की प्रेरणा

जब समूचा राष्ट्र ही अपनी निहित शक्तियों के प्रति अनभिज्ञ होने के कारण आत्मग्लानि से ग्रस्त हो जाता है तब कोई अद्वितीय विजय ही…

11 September 2013 Mukul Kanitkar
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लूला लोकतंत्र : जरुरी है सर्जरी

वर्ष २०११ में हुए आंदोलनों में जनता की प्रचंड ताकत देखने में आई | किसी भी नीति के निर्धारण में जनता की सोच लोकतान्त्रिक…

22 January 2012 Mukul Kanitkar
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