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सामयिक टिप्पणी

शिष्य के शिष्यत्व से ही है गुरु की महिमा

गुरु की गुरुता शिष्य की श्रद्धा से है इसलिए हम अपने मन में शिष्यत्व को धारण किये रहें। आज यदि सारे शिक्षक अपने मन…

3 July 2023 Mukul Kanitkar
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चरित्र

अनावृत्त करें स्वामी विवेकानंद के अनुपम उपहार

समृद्धि व संस्कृति की समान उपासना करनेवाले विश्वगुरु भारत का स्वप्न यदि हम साकार करना चाहते हैं तो स्वामीजी के आवृत्त उपहारों का अनुसंधान…

13 January 2023 Mukul Kanitkar
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sangathan

सूचना के बाद सोचना नहीं

स्वयंसेवी संगठन में कर्मचारी नहीं स्वयंसेवक कार्यकर्ता होते हैं जो किसी अनुबंध के कारण नहीं अपितु कार्य के पावित्र्य, महत्व तथा परिणाम के कारण…

10 December 2022 Mukul Kanitkar
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sangathan

संगठन विकास और विस्तार के ‘स’कारात्मक सूत्र

सम्पर्क प्रत्येक कार्यकर्ता का नित्य कार्य है। कोई भी दिन इसके बिना नहीं हो सकता। संकल्प के साथ संपर्क करने से वह साधना बन…

5 December 2022 Mukul Kanitkar
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Uncategorized

शुद्ध वाणी ही सिद्धिदात्री

संस्कृत शब्द का अर्थ ही संस्कारित होता है। स्वरयंत्र से सहज निकलने वाली प्राकृत वाणी का संस्कार होने से वह संस्कृत हो जाती है।…

4 October 2022 Mukul Kanitkar
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