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भारत भविष्य

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चुनावी रणभूमी मे राष्ट्रवाद का शंखनाद

चुनाव लोकतंत्र का महोत्सव है। वर्तमान में चुनाव आयोग द्वारा डाले गये कठोर निर्बंधों के कारण इस महोत्सव का उत्साह कुछ धीमा पड गया दिखता…

29 November 2013 Mukul Kanitkar
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दिग्विजय से पाएं विश्वविजय की प्रेरणा

जब समूचा राष्ट्र ही अपनी निहित शक्तियों के प्रति अनभिज्ञ होने के कारण आत्मग्लानि से ग्रस्त हो जाता है तब कोई अद्वितीय विजय ही…

11 September 2013 Mukul Kanitkar
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लूला लोकतंत्र : जरुरी है सर्जरी

वर्ष २०११ में हुए आंदोलनों में जनता की प्रचंड ताकत देखने में आई | किसी भी नीति के निर्धारण में जनता की सोच लोकतान्त्रिक…

22 January 2012 Mukul Kanitkar
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स्वामी विवेकानन्द का राष्ट्र-ध्यान 25 से 27 दिसम्बर 1892

25 दिसम्बर 1892, स्वामी विवेकानन्द ने श्रीपाद शिला पर अपना ध्यान प्रारम्भ किया। मान्यता है कि उसी शिलापर देवी कन्याकुमारी ने स्वयं तपस्या की…

26 December 2011 Mukul Kanitkar
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