लेखक

Mukul Kanitkar

244 लेख

आलेख

हमारे विनायकराव — एक आदर्श प्रचारक

संगठनात्मक कार्य से सक्रिय निवृत्ति सर्वाधिक उल्लेखनीय थी। पूरा सम्पर्क तोड़े बिना उन्होंने उलझना पूर्ण बंद कर दिया। यह आश्चर्यजनक था कि बिना कण…

20 July 2023 Mukul Kanitkar
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आलेख

अर्जुन का शिष्यत्व ही गीता का निमित्त

कहते हैं कि गीता समझनी है तो अर्जुन के भाव में आना होगा। अर्थात युद्धभूमि में भी विस्तृत स्वाध्याय करने को तत्पर होना होगा।…

11 July 2023 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

शिष्य के शिष्यत्व से ही है गुरु की महिमा

गुरु की गुरुता शिष्य की श्रद्धा से है इसलिए हम अपने मन में शिष्यत्व को धारण किये रहें। आज यदि सारे शिक्षक अपने मन…

3 July 2023 Mukul Kanitkar
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चरित्र

अनावृत्त करें स्वामी विवेकानंद के अनुपम उपहार

समृद्धि व संस्कृति की समान उपासना करनेवाले विश्वगुरु भारत का स्वप्न यदि हम साकार करना चाहते हैं तो स्वामीजी के आवृत्त उपहारों का अनुसंधान…

13 January 2023 Mukul Kanitkar
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sangathan

शुद्ध, सात्विक प्रेम से चमुत्व

ध्येय के अनुरूप कार्यप्रणाली और कार्यपद्धति का विकास योजनापूर्वक करने के बाद पूर्ण विश्वास के साथ उसपर लगे रहना ही एकमात्र मार्ग है। इस…

19 December 2022 Mukul Kanitkar
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sangathan

सूचना के बाद सोचना नहीं

स्वयंसेवी संगठन में कर्मचारी नहीं स्वयंसेवक कार्यकर्ता होते हैं जो किसी अनुबंध के कारण नहीं अपितु कार्य के पावित्र्य, महत्व तथा परिणाम के कारण…

10 December 2022 Mukul Kanitkar
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