दुर्गुणों का बीज से संहार
अधिशील से अधिप्रज्ञ तक की शिक्षा में यह सूत्र समान है। शोधन करते समय ही लगातार मैल भी एकत्रित होता रहता है। कोई निश्चित…
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अधिशील से अधिप्रज्ञ तक की शिक्षा में यह सूत्र समान है। शोधन करते समय ही लगातार मैल भी एकत्रित होता रहता है। कोई निश्चित…
पूरा लेख पढ़ेंमहिष मानव के भीतर अवशिष्ट पशुत्व का प्रतीक है सब देवताओं के तेजांश से संगठित माँ कात्यायनी ही उस पर आरूढ़ हो उसका मर्दन…
पूरा लेख पढ़ेंसामन्यतः मन के रूप में सम्बोधित अन्तःकरण में चार करण (instruments) आते है -मन, बुद्धि, चित्त और अहं। एक ही आंतरिक व्यवस्था जिसे गीता…
पूरा लेख पढ़ेंजैसे बीज में पूरा विश्व छिपा होता है वैसे ही मनुष्य में पूर्णत्व संभावना के रूप में विद्यमान होता है। शिक्षा का लक्ष्य है…
पूरा लेख पढ़ेंअधिजनन के द्वारा अच्छी प्रजा का निर्माण तथा अधि- अयन अर्थात् अध्ययन के द्वारा मनुष्य के जीवन-गठन का मार्ग प्रशस्त करने के साथ ही…
पूरा लेख पढ़ेंजन्म के साथ ही जातक का अध्ययन प्रारंभ होता है। आँखे खोलते ही जगत को ग्रहण करने का साहसिक नवाचार हर बालक को करना…
पूरा लेख पढ़ेंविद्यार्जन के क्षेत्र में सबसे दुष्कर किंतु महत्वपूर्ण कार्य अधिगम फलित का मात्रात्मक निर्धारण है। अध्ययन की प्रक्रिया अर्थात् अधिगम से हम क्या परिणाम…
पूरा लेख पढ़ेंउत्सव तो है तप का चौदह वर्ष वनवास का रावण वध के युद्ध से कर समापन श्रीराम के अ-योध्या पुनरागमन का साथ ही नंदीग्राम…
पूरा लेख पढ़ेंYajna (Sacrifice), Dana (donation) and Tapa (austerity) have been given immense importance in Bhagwad Geeta. On one hand, the renounciation of Karma has been…
पूरा लेख पढ़ेंएक अद्भुत अनुभूति उज्जैन में एक अत्यंत उच्च शिक्षा विभूषित गृहस्थ के घर पर हुई। जिनके घर हम प्रातराश के लिए गए थे वे…
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