तपोत्सव दीपावली 

Mukul Kanitkar 2 मिनट का पठन

उत्सव तो है तप का 

चौदह वर्ष वनवास का 

रावण वध के युद्ध से कर समापन 

श्रीराम के अ-योध्या पुनरागमन का 

साथ ही 

नंदीग्राम तपस्वी द्वारा

पादुका के सक्षम दायित्ववहन से 

रामराज्य निर्माण करते 

महात्मा भरत के समर्पण का 

उत्सव तो तप का है 

चित्रकूट, जनस्थान पंचवटी में

ऋषि – राम सन्निधि में 

कठोर तितिक्षा के बाद भी  

मृगतृष्णा से अपहृत,  

अशोक वाटिका में 

त्रिजटा, मंदोदरी की रक्षा में 

पतिव्रत प्रतीक्षा से 

अग्निपरीक्षा तक अखंड साधना के 

क्षणिक विराम का 

उत्सव तो है तप का 

हर लाभ के शुभ होने हेतु 

महालक्ष्मी के ऐश्वर्य

धन, धान्य, धैर्य, शौर्य, 

विद्या, कार्य, विजया और 

राज इन अष्टलक्ष्मी के 

परिपूर्ण प्रसाद हेतु अनिवार्य 

परिश्रम, नवोन्मेष, उद्यम 

और पारस्परिक सहकार्य का 

उत्सव तो है तप का 

अमावस की रात्रि 

सोम के विलोपन में 

रवि के समान प्रखर 

उजास प्रकटाने दीप के आश्रय से 

तैल, बाती के स्वप्रेरित प्रज्वलन का 

नाम-रूप और मन-भाव

आहुति और अनुभूति से 

से भी सूक्ष्म प्राण की 

कालरात्रि की मध्यरात्रि किये 

जप, होम आदि तंत्र साधना का 

उत्सव तो है तप का 

रामराज्य की पुनर्स्थापना 

परमवैभव संपन्न

विश्वगुरु भारत माता के 

उदात्त ध्येय को करने साकार 

करें सब शुभ संकल्प 

ऋषित्व जागरण का

दीपावली 

उत्सव तो है तप का 

Mukul Kanitkar

लेखक

Mukul Kanitkar

भारतीय संस्कृति, समाज, शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्रजीवन पर लेखन।

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