दुर्गुणों का बीज से संहार
अधिशील से अधिप्रज्ञ तक की शिक्षा में यह सूत्र समान है। शोधन करते समय ही लगातार मैल भी एकत्रित होता रहता है। कोई निश्चित…
पूरा लेख पढ़ेंसंबंधित लेख
41 लेख
अधिशील से अधिप्रज्ञ तक की शिक्षा में यह सूत्र समान है। शोधन करते समय ही लगातार मैल भी एकत्रित होता रहता है। कोई निश्चित…
पूरा लेख पढ़ेंमहिष मानव के भीतर अवशिष्ट पशुत्व का प्रतीक है सब देवताओं के तेजांश से संगठित माँ कात्यायनी ही उस पर आरूढ़ हो उसका मर्दन…
पूरा लेख पढ़ेंसामन्यतः मन के रूप में सम्बोधित अन्तःकरण में चार करण (instruments) आते है -मन, बुद्धि, चित्त और अहं। एक ही आंतरिक व्यवस्था जिसे गीता…
पूरा लेख पढ़ेंजैसे बीज में पूरा विश्व छिपा होता है वैसे ही मनुष्य में पूर्णत्व संभावना के रूप में विद्यमान होता है। शिक्षा का लक्ष्य है…
पूरा लेख पढ़ेंअधिजनन के द्वारा अच्छी प्रजा का निर्माण तथा अधि- अयन अर्थात् अध्ययन के द्वारा मनुष्य के जीवन-गठन का मार्ग प्रशस्त करने के साथ ही…
पूरा लेख पढ़ेंजन्म के साथ ही जातक का अध्ययन प्रारंभ होता है। आँखे खोलते ही जगत को ग्रहण करने का साहसिक नवाचार हर बालक को करना…
पूरा लेख पढ़ेंAnother Post as a precursor to IYD. This piece was written for bharatniti.in giving it here for the blog followers. http://www.bharatniti.in/story/look-beyond-political-controversy-yoga-is-for-all/44 Yoga has been…
पूरा लेख पढ़ेंभारतीय मनिषा ने अपने शोधकार्य का बहुत बड़ा अंश मन के बारे में अनुसंधान करने में लगाया है| मन की पहेली को अत्यंत गहराई…
पूरा लेख पढ़ेंWhat was the purpose of Swami Vivekananda’s life? Though it may be deemed arrogant to ask such a question, for those who want to…
पूरा लेख पढ़ेंजो सूर्यनमस्कार का प्रतिदिन अभ्यास करते हैं, उनको आयु, वीर्य, बल, प्रज्ञा तथा तेज की प्राप्ति होती है और सामूहिक सूर्यनमस्कार के अभ्यास से…
पूरा लेख पढ़ें