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आलेख

सदाचार अर्थात सेवा में पहले मै और सुविधा में पहले आप!

गढ़े जीवन अपना अपना -19 राजा की सवारी निकली थी। आगे आगे सेना की एक टुकड़ी मार्ग में आनेवाले लोगों को रोककर मार्ग खाली…

25 November 2012 Mukul Kanitkar
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सफलता की चाह नहीं! चिरविजय का पराक्रम !!

कर्मयोग 10: ‘‘हर कोई सफल होना चाहता है। पर क्या यह सम्भव है? आपकी गीता क्या कहती है?’’ युवाओं की जिज्ञासायें विद्रोह के आवरण…

19 January 2012 Mukul Kanitkar
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जाने अपना वर्ण! पहचाने अपना स्वभाव!

कर्मयोग 7: स्वधर्म पर आधारित कर्म से ही जीवन में परिपूर्णता एवं संतुष्टि प्राप्त हो सकती है। यही गीता का संदेश है। इसको जीवन…

17 November 2011 Mukul Kanitkar
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