सदाचार अर्थात सेवा में पहले मै और सुविधा में पहले आप!
गढ़े जीवन अपना अपना -19 राजा की सवारी निकली थी। आगे आगे सेना की एक टुकड़ी मार्ग में आनेवाले लोगों को रोककर मार्ग खाली…
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गढ़े जीवन अपना अपना -19 राजा की सवारी निकली थी। आगे आगे सेना की एक टुकड़ी मार्ग में आनेवाले लोगों को रोककर मार्ग खाली…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -16 आधी रात का समय था। हस्तिनापुर के प्रासाद में सब ओर शांति थी। अर्जुन को लघुशंका के लिये जाना…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -14 आद्य क्रांतिकारी वासुदेव बलवन्त फडके को जेल में बंद रखना भी सम्भव नहीं था। जेल से भागने के लिये…
पूरा लेख पढ़ेंकर्मयोग 10: ‘‘हर कोई सफल होना चाहता है। पर क्या यह सम्भव है? आपकी गीता क्या कहती है?’’ युवाओं की जिज्ञासायें विद्रोह के आवरण…
पूरा लेख पढ़ेंकर्मयोग 9: प्रश्नों का गीता में बड़ा महत्व है। अर्जुन के प्रश्नों से ही गीता का प्रवाह आगे बढ़ता है। अन्यथा तो दूसरे अध्याय…
पूरा लेख पढ़ेंकर्मयोग 8: आठवी कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची ने पत्र में पूछा, ‘‘भैया ये आसक्ति क्या होती है?’’ सुसंस्कृत परिवार था। घर में पाठ,…
पूरा लेख पढ़ेंकर्मयोग 7: स्वधर्म पर आधारित कर्म से ही जीवन में परिपूर्णता एवं संतुष्टि प्राप्त हो सकती है। यही गीता का संदेश है। इसको जीवन…
पूरा लेख पढ़ेंकर्मयोग ५: सुबह कर्मचारी के हाथ से पानी का गिलास गिरा और पानी बिखरा। आवाज से बॉस वहाँ आयें देखकर गुस्सा हुए। डाँट लगाई,…
पूरा लेख पढ़ेंएक देश सारे विश्व मे विख्यात था। किसी पत्रकार ने सोचा इसकी ख्याति का रहस्य खोजा जाय। जब वह अपनी खोजबीन के लिये उस…
पूरा लेख पढ़ेंकिसी ने सटीक संदेश भेजा। जीवन में जितनी संपत्ति बढ़ती है उतना शून्य, खालीपन भी बढ़ता है। आज आधुनिक मानव की सुविधाओं का स्तर…
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