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Shrikrishna

10 लेख

आलेख

अर्जुन का शिष्यत्व ही गीता का निमित्त

कहते हैं कि गीता समझनी है तो अर्जुन के भाव में आना होगा। अर्थात युद्धभूमि में भी विस्तृत स्वाध्याय करने को तत्पर होना होगा।…

11 July 2023 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

शिष्य के शिष्यत्व से ही है गुरु की महिमा

गुरु की गुरुता शिष्य की श्रद्धा से है इसलिए हम अपने मन में शिष्यत्व को धारण किये रहें। आज यदि सारे शिक्षक अपने मन…

3 July 2023 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

श्रीकृष्ण का शिष्यत्व ग्रहण कर स्वाध्याय करें।

अर्जुन बनेंगे तभी गीता समझेंगे। जब तक शिष्यत्व नहीं लेते तब तक अर्जुन नहीं बनते। धृतराष्ट्र का मामकाः जब अर्जुन में प्रवेश कर गया…

3 December 2022 Mukul Kanitkar
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आलेख

एकाग्रता और भाव विस्तार से ही अभय

सामन्यतः मन के रूप में सम्बोधित अन्तःकरण में चार करण (instruments) आते है -मन, बुद्धि, चित्त और अहं। एक ही आंतरिक व्यवस्था जिसे गीता…

30 September 2022 Mukul Kanitkar
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कविता

फिर फूंको पांचजन्य ! फिर सुनाओ गीता !!

आज भ्रमित अर्जुन विषादग्रस्त नहीं आक्रोशित है। तमस नहीं आज रजस का प्रकोप है। अपने में सिमटा सकुचा, परास्त नहीं आज का अर्जुन, संख्याबल…

24 December 2012 Mukul Kanitkar
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