अर्जुन का शिष्यत्व ही गीता का निमित्त
कहते हैं कि गीता समझनी है तो अर्जुन के भाव में आना होगा। अर्थात युद्धभूमि में भी विस्तृत स्वाध्याय करने को तत्पर होना होगा।…
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कहते हैं कि गीता समझनी है तो अर्जुन के भाव में आना होगा। अर्थात युद्धभूमि में भी विस्तृत स्वाध्याय करने को तत्पर होना होगा।…
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गुरु की गुरुता शिष्य की श्रद्धा से है इसलिए हम अपने मन में शिष्यत्व को धारण किये रहें। आज यदि सारे शिक्षक अपने मन…
पूरा लेख पढ़ेंअर्जुन बनेंगे तभी गीता समझेंगे। जब तक शिष्यत्व नहीं लेते तब तक अर्जुन नहीं बनते। धृतराष्ट्र का मामकाः जब अर्जुन में प्रवेश कर गया…
पूरा लेख पढ़ेंNavratri 1 Let’s cultivate Noble resolves The most difficult but important task in the field of learning is the quantitative determination of the learning…
पूरा लेख पढ़ेंConsciousness is awakened only through the exercise of restraint, i.e., regulation in the use of the senses. Whole life the extent and choice of…
पूरा लेख पढ़ेंThe most difficult but important task in the field of learning is the quantitative determination of the learning outcomes. What result do we want…
पूरा लेख पढ़ेंसामन्यतः मन के रूप में सम्बोधित अन्तःकरण में चार करण (instruments) आते है -मन, बुद्धि, चित्त और अहं। एक ही आंतरिक व्यवस्था जिसे गीता…
पूरा लेख पढ़ेंThere has been an eternal battle between the Dharma and the Adharma. It has been occurring since the era of the Mahabharata. The selfish…
पूरा लेख पढ़ेंआज भ्रमित अर्जुन विषादग्रस्त नहीं आक्रोशित है। तमस नहीं आज रजस का प्रकोप है। अपने में सिमटा सकुचा, परास्त नहीं आज का अर्जुन, संख्याबल…
पूरा लेख पढ़ेंकर्मयोग ५: सुबह कर्मचारी के हाथ से पानी का गिलास गिरा और पानी बिखरा। आवाज से बॉस वहाँ आयें देखकर गुस्सा हुए। डाँट लगाई,…
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