मानवता के शत्रु आज के चण्ड-मुण्ड
एक शारीरिक बल से प्रसार में विश्वास रखता है और दूसरा कपट में। केवल भारत ही नहीं पूरा विश्व इन आततायी विचारधाराओं के प्रकोप…
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एक शारीरिक बल से प्रसार में विश्वास रखता है और दूसरा कपट में। केवल भारत ही नहीं पूरा विश्व इन आततायी विचारधाराओं के प्रकोप…
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एक जन, एक मन से एक ध्येय की और भिन्न भिन्न मार्गों से अग्रसर होते हुए एक अंतःकरण से सामूहिक और व्यक्तिगत गौरव, वैभव…
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कूष्माण्डा के अण्ड में पूरा ब्रह्मांड विद्यमान है। पूरा अस्तित्व ही एक विराट पुरुष है। राष्ट्र उसके अंग हैं। राष्ट्र का भी जैविक विराट…
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‘नित्य नूतन, चिर पुरातन’ यह विशेषण इस कालसुसंगत जीवन पद्धति के लिए अत्यंत समर्पक है। शाश्वत, सनातन, प्राकृतिक, शास्त्रीय मानवी सिद्धांतों का युगानुकूल और…
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इस नवरात्रि उत्तरापथ की संकल्प यात्रा में इस विचार यजन पर स्वाध्याय करते हैं। एकात्म और समग्र भाव की सामयिक प्रस्तुति तथा विघटनकारी बलों…
पूरा लेख पढ़ेंध्येय के अनुरूप कार्यप्रणाली और कार्यपद्धति का विकास योजनापूर्वक करने के बाद पूर्ण विश्वास के साथ उसपर लगे रहना ही एकमात्र मार्ग है। इस…
पूरा लेख पढ़ेंFrom childhood, by practice of divine asset like Arjava (Simplicity), the mind becomes pure. The distinction between internal and external ends. This is the…
पूरा लेख पढ़ेंIf a cell refuses to obey the discipline of the body and does not die when time comes, then it becomes the cause of…
पूरा लेख पढ़ेंConsciousness is awakened only through the exercise of restraint, i.e., regulation in the use of the senses. Whole life the extent and choice of…
पूरा लेख पढ़ेंसंस्कृत शब्द का अर्थ ही संस्कारित होता है। स्वरयंत्र से सहज निकलने वाली प्राकृत वाणी का संस्कार होने से वह संस्कृत हो जाती है।…
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