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नवरात्रि

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बुद्धि का परिशोधन मेधा से प्रज्ञा तक

महिष मानव के भीतर अवशिष्ट पशुत्व का प्रतीक है सब देवताओं के तेजांश से संगठित माँ कात्यायनी ही उस पर आरूढ़ हो उसका मर्दन…

1 October 2022 Mukul Kanitkar
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एकाग्रता और भाव विस्तार से ही अभय

सामन्यतः मन के रूप में सम्बोधित अन्तःकरण में चार करण (instruments) आते है -मन, बुद्धि, चित्त और अहं। एक ही आंतरिक व्यवस्था जिसे गीता…

30 September 2022 Mukul Kanitkar
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आओ बोए शुभ संकल्प

विद्यार्जन के क्षेत्र में सबसे दुष्कर किंतु महत्वपूर्ण कार्य अधिगम फलित का मात्रात्मक निर्धारण है। अध्ययन की प्रक्रिया अर्थात् अधिगम से हम क्या परिणाम…

26 September 2022 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

या देवी सर्व संघेशु कार्यपद्धति रूपेण संस्थिता …

संगठन की कार्यपद्धतिः नवरात्री का आज पाँचवा दिन है। आज की देवी है स्कंदमाता। स्कंदमाता कुमार कार्तिकेय की माता के रूप में पार्वती जी…

1 October 2011 Mukul Kanitkar
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