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सामयिक टिप्पणी

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बुद्धि का परिशोधन मेधा से प्रज्ञा तक

महिष मानव के भीतर अवशिष्ट पशुत्व का प्रतीक है सब देवताओं के तेजांश से संगठित माँ कात्यायनी ही उस पर आरूढ़ हो उसका मर्दन…

1 October 2022 Mukul Kanitkar
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एकाग्रता और भाव विस्तार से ही अभय

सामन्यतः मन के रूप में सम्बोधित अन्तःकरण में चार करण (instruments) आते है -मन, बुद्धि, चित्त और अहं। एक ही आंतरिक व्यवस्था जिसे गीता…

30 September 2022 Mukul Kanitkar
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भावशुद्धि से ही ज्ञान का साक्षात्कार

जैसे बीज में पूरा विश्व छिपा होता है वैसे ही मनुष्य में पूर्णत्व संभावना के रूप में विद्यमान होता है। शिक्षा का लक्ष्य है…

29 September 2022 Mukul Kanitkar
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पशु-असुर का अधिलवण दिव्यत्व का प्रस्फुटन

अधिजनन के द्वारा अच्छी प्रजा का निर्माण तथा अधि- अयन अर्थात् अध्ययन के द्वारा मनुष्य के जीवन-गठन का मार्ग प्रशस्त करने के साथ ही…

28 September 2022 Mukul Kanitkar
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आलेख

आओ बोए शुभ संकल्प

विद्यार्जन के क्षेत्र में सबसे दुष्कर किंतु महत्वपूर्ण कार्य अधिगम फलित का मात्रात्मक निर्धारण है। अध्ययन की प्रक्रिया अर्थात् अधिगम से हम क्या परिणाम…

26 September 2022 Mukul Kanitkar
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आलेख

नियमित गुरुदक्षिणा से अपनी आय को शुद्ध करें

यज्ञ, दान और तप इन तीन कर्मों को भगवद्गीता में बड़ा महत्व दिया गया है। भगवद्गीता के अठारहवें अध्याय में जहाँ पर कर्मों का…

19 November 2019 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

नोबेल की राजनीति या अर्थशास्त्र का भ्रम

भारत में तो अर्थशास्त्र में ही राजशास्त्र भी सम्मिलित है। कौटिल्य का अर्थशास्त्र यह केवल आज अंग्रेजी में जिसे Economics कहते हैं, उसका ग्रंथ…

22 October 2019 Mukul Kanitkar
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