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sangathan

अधिकस्य अधिकं फलम्

शुद्ध सात्विक प्रेम कार्य का आधार होने से स्नेहमय, आत्मीय, पारिवारिक संबंध तो कार्यकर्ताओं में निश्चित ही होते हैं। कार्यकर्ता जुड़ता भी किसी व्यक्ति…

25 July 2023 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

शिष्य के शिष्यत्व से ही है गुरु की महिमा

गुरु की गुरुता शिष्य की श्रद्धा से है इसलिए हम अपने मन में शिष्यत्व को धारण किये रहें। आज यदि सारे शिक्षक अपने मन…

3 July 2023 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

श्रीकृष्ण का शिष्यत्व ग्रहण कर स्वाध्याय करें।

अर्जुन बनेंगे तभी गीता समझेंगे। जब तक शिष्यत्व नहीं लेते तब तक अर्जुन नहीं बनते। धृतराष्ट्र का मामकाः जब अर्जुन में प्रवेश कर गया…

3 December 2022 Mukul Kanitkar
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शुद्ध वाणी ही सिद्धिदात्री

संस्कृत शब्द का अर्थ ही संस्कारित होता है। स्वरयंत्र से सहज निकलने वाली प्राकृत वाणी का संस्कार होने से वह संस्कृत हो जाती है।…

4 October 2022 Mukul Kanitkar
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