हिंदुत्व में हर भूमिका में पूज्य नारी
‘नित्य नूतन, चिर पुरातन’ यह विशेषण इस कालसुसंगत जीवन पद्धति के लिए अत्यंत समर्पक है। शाश्वत, सनातन, प्राकृतिक, शास्त्रीय मानवी सिद्धांतों का युगानुकूल और…
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‘नित्य नूतन, चिर पुरातन’ यह विशेषण इस कालसुसंगत जीवन पद्धति के लिए अत्यंत समर्पक है। शाश्वत, सनातन, प्राकृतिक, शास्त्रीय मानवी सिद्धांतों का युगानुकूल और…
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इस नवरात्रि उत्तरापथ की संकल्प यात्रा में इस विचार यजन पर स्वाध्याय करते हैं। एकात्म और समग्र भाव की सामयिक प्रस्तुति तथा विघटनकारी बलों…
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अब भारत का भी कक्षा बदलने का समय आ गया है। प्रस्थापित प्रतिमानों के साथ विकास की क्षमता को सिद्ध करने के बाद अब…
पूरा लेख पढ़ेंशुद्ध सात्विक प्रेम कार्य का आधार होने से स्नेहमय, आत्मीय, पारिवारिक संबंध तो कार्यकर्ताओं में निश्चित ही होते हैं। कार्यकर्ता जुड़ता भी किसी व्यक्ति…
पूरा लेख पढ़ेंसंगठनात्मक कार्य से सक्रिय निवृत्ति सर्वाधिक उल्लेखनीय थी। पूरा सम्पर्क तोड़े बिना उन्होंने उलझना पूर्ण बंद कर दिया। यह आश्चर्यजनक था कि बिना कण…
पूरा लेख पढ़ेंWords of Parampoojya Sarasanghachalak made complete sense. When given responsibility of sah sangathan mantri in 2012 under the mentorship of Vinayakrao who was Sangathan…
पूरा लेख पढ़ेंकहते हैं कि गीता समझनी है तो अर्जुन के भाव में आना होगा। अर्थात युद्धभूमि में भी विस्तृत स्वाध्याय करने को तत्पर होना होगा।…
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गुरु की गुरुता शिष्य की श्रद्धा से है इसलिए हम अपने मन में शिष्यत्व को धारण किये रहें। आज यदि सारे शिक्षक अपने मन…
पूरा लेख पढ़ेंसमृद्धि व संस्कृति की समान उपासना करनेवाले विश्वगुरु भारत का स्वप्न यदि हम साकार करना चाहते हैं तो स्वामीजी के आवृत्त उपहारों का अनुसंधान…
पूरा लेख पढ़ेंसंपर्क, संवाद, सूचना और संबंध से जुड़े कार्यकर्ता को वैधानिक तथा भावात्मक रूप से परिवार का अंग बनाने का नाम है सदस्यता। जैसे नवजात…
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