संबंधित लेख

धर्मराज्य

18 लेख

चरित्र

शरीर-मन-बुद्धि तीनों का वीरव्रत

वीरता मानसिक क्षमता है उसका सर्वोत्तम रूप महावीर है। विपरीत स्थिति में भी व्यवहारकुशलता से मार्ग निकालने की बौद्धिक योग्यता का नाम विक्रम और…

1 June 2026 Mukul Kanitkar
पूरा लेख पढ़ें
चरित्र

दायित्व ही कार्यकर्ता का परिचय

हमारा प्रत्येक परिचय ही हमें दायित्व देता है। जैसे हम मनुष्य हैं तो अपेक्षा है कि मानवता का आचरण करें। भारतीय हैं तो हमारा…

29 May 2026 Mukul Kanitkar
पूरा लेख पढ़ें
सामयिक टिप्पणी

ज्ञान-गुण से तीनों लोक उजागर

हनुमानजी के लिए सागर की उपमा अत्यन्त समीचीन है। सागर असीम होता है किंतु कभी अपनी सीमा को नहीं लांघता। ग्रहण करने में कोई…

8 April 2026 Mukul Kanitkar
पूरा लेख पढ़ें
सामयिक टिप्पणी

जनसंख्या बोझ नहीं संतानलक्ष्मी का वरदान

मूल विषय समाज के मानस का है। प्रजा को बोझ मानने का विचार जबतक प्रचलन में रहेगा तब तक इस स्थिति में सुधार नहीं…

27 September 2025 Mukul Kanitkar
पूरा लेख पढ़ें
सामयिक टिप्पणी

अन्नदाता पर कृपा रहे धान्यलक्ष्मी की, ना बने अन्न विक्रेता

धान्यलक्ष्मी की कृपा भारत पर बनी रहे। वर्तमान व्यवस्था आदर्श अथवा धार्मिक तो नहीं है किंतु दिशा उचित है। इस नवरात्रि स्वाध्याय के माध्यम…

25 September 2025 Mukul Kanitkar
पूरा लेख पढ़ें
सामयिक टिप्पणी

श्राद्धों में दान का महत्व

श्राद्ध का सबसे बड़ा तत्त्व है पितरों के प्रति श्रद्धा। उस श्रद्धा का व्यवहार में प्रयोग त्याग द्वारा ही संभव है। जिनके प्रति सम्मान…

18 September 2025 Mukul Kanitkar
पूरा लेख पढ़ें
सामयिक टिप्पणी

हिंदू नववर्ष ही साक्षात् नववर्ष

काल की वैज्ञानिक समझ से ही वर्षप्रतिपदा को सालभर के साढ़े तीन मुहुर्तों में से एक मानते हैं। यह पूर्ण मुहुर्त है। इस दिन शुभकार्य…

30 March 2025 Mukul Kanitkar
पूरा लेख पढ़ें
सामयिक टिप्पणी

आत्मोद्धार हेतु श्रद्धा से मनाएँ श्राद्ध

पितरों के उद्धार के लिए श्राद्ध में श्रद्धा ना भी हो तब भी आत्मोद्धार के लिये श्राद्ध अवश्य करें। भाद्रपद मास उत्तरायण के मध्य…

24 September 2024 Mukul Kanitkar
पूरा लेख पढ़ें