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धर्मराज्य

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सामयिक टिप्पणी

हिंदुत्व में हर भूमिका में पूज्य नारी

‘नित्य नूतन, चिर पुरातन’ यह विशेषण इस कालसुसंगत जीवन पद्धति के लिए अत्यंत समर्पक है। शाश्वत, सनातन, प्राकृतिक, शास्त्रीय मानवी सिद्धांतों का युगानुकूल और…

16 October 2023 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

श्रीकृष्ण का शिष्यत्व ग्रहण कर स्वाध्याय करें।

अर्जुन बनेंगे तभी गीता समझेंगे। जब तक शिष्यत्व नहीं लेते तब तक अर्जुन नहीं बनते। धृतराष्ट्र का मामकाः जब अर्जुन में प्रवेश कर गया…

3 December 2022 Mukul Kanitkar
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शुद्ध वाणी ही सिद्धिदात्री

संस्कृत शब्द का अर्थ ही संस्कारित होता है। स्वरयंत्र से सहज निकलने वाली प्राकृत वाणी का संस्कार होने से वह संस्कृत हो जाती है।…

4 October 2022 Mukul Kanitkar
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आलेख

बुद्धि का परिशोधन मेधा से प्रज्ञा तक

महिष मानव के भीतर अवशिष्ट पशुत्व का प्रतीक है सब देवताओं के तेजांश से संगठित माँ कात्यायनी ही उस पर आरूढ़ हो उसका मर्दन…

1 October 2022 Mukul Kanitkar
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आलेख

बहुआयामी धर्म की एकात्म संकल्पना

किसी भी राष्ट्र में सामाजिक, राजनैतिक समस्याओके मूल में वैचारिक अस्पष्टता की बहुत बडी भूमिका रहती है। भारत में ब्रिटिष राज के अवषेष आज…

23 December 2015 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

अंतरतम के प्रह्लाद की खोज का पर्व: होली

समाज हिरण्यकश्यपुओं से भर गया है। हिरण्य के दो अर्थ है – एक है स्वर्ण और दूसरा है चमकनेवाला। धन और दिखावे के प्रति…

27 March 2013 Mukul Kanitkar
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