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भारत माता

58 लेख

सामयिक टिप्पणी

विश्व-संचार से विश्वमित्र

समृद्ध विश्व-संचार के माध्यम से भारत विश्वगुरु के साथ ही जन-जन की आवश्यकता की आपूर्ति कर विश्वमित्र और विश्वबंधु भी बना।

26 September 2025 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

अन्नदाता पर कृपा रहे धान्यलक्ष्मी की, ना बने अन्न विक्रेता

धान्यलक्ष्मी की कृपा भारत पर बनी रहे। वर्तमान व्यवस्था आदर्श अथवा धार्मिक तो नहीं है किंतु दिशा उचित है। इस नवरात्रि स्वाध्याय के माध्यम…

25 September 2025 Mukul Kanitkar
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सनातन विकास प्रतिमान

धान्यलक्ष्मी का आशिर्वाद भरे अन्न भांडार

अष्टलक्ष्मी में तीसरी है धान्यलक्ष्मी। यह अन्न की देवी है। इनका स्वरूप भी पोषणकर्ता है। वस्त्र हरित हैं। आठ भुजाओं में धान की बाली,…

24 September 2025 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

धन अर्थात् जोड़ना

धनलक्ष्मी की उपासना मनुष्य को उत्पादक बनाती है। जो भी उसे प्राप्त होता है उसका मूल्यवर्द्धन करना ही धन का उपार्जन है। अपने ज्ञान,…

23 September 2025 Mukul Kanitkar
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सनातन विकास प्रतिमान

संतुलित विकास समुत्कर्ष की देवी आदिलक्ष्मी

आदिलक्ष्मी की उपासना अभ्युदय से अधिक निःश्रेयस अर्थात् आंतरिक उन्नति का प्रसाद भी प्रदान करती है। अतः अर्थतंत्र में भी उपभोग में संयम अथवा…

22 September 2025 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

श्राद्धों में दान का महत्व

श्राद्ध का सबसे बड़ा तत्त्व है पितरों के प्रति श्रद्धा। उस श्रद्धा का व्यवहार में प्रयोग त्याग द्वारा ही संभव है। जिनके प्रति सम्मान…

18 September 2025 Mukul Kanitkar
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