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Mukul Kanitkar

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चरित्र

महीयसी लोकमाता निवेदिता को समाधि शताब्दी पर विनम्र श्रद्धांजलि

भारत की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े बिना भारत को समझना और उससे प्रेम करना असम्भव है। स्वामी विवेकानन्द के आहवान पर भारत…

13 October 2011 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

आहुति अष्टसिद्धियों की . . .

समर्पण: कार्यकर्ता की सफलता उसके समर्पण पर निर्भर करती है। जितना अधिक समर्पण होगा उतना ही कार्यकर्ता प्रभावी होगा। कार्यकर्ता की सिद्धी के क्या…

6 October 2011 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

महागौरी उपासना : प्रबुद्ध वर्ग की वैचारिक क्रांति

वैचारिक आंदोलनः हमने मधु-कैटभ को आधुनिक मिड़िया के साथ जोड़कर देखा था। उसी तारतम्य में शुम्भ-निशुम्भ को भी समझना होगा। शुम्भ का अर्थ होता…

4 October 2011 Mukul Kanitkar
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