क्या हम तत्पर है?
गढ़े जीवन अपना अपना -10 एक गुरुकुल में दो शिष्य थे सुहृत और सुकृत। सुकृत बड़ा विद्वान था। जो भी पाठ पढ़ाया जाता तुरन्त…
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गढ़े जीवन अपना अपना -10 एक गुरुकुल में दो शिष्य थे सुहृत और सुकृत। सुकृत बड़ा विद्वान था। जो भी पाठ पढ़ाया जाता तुरन्त…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -9 छलांग तो लगानी ही पड़ती है। साधारणतः जीवन में किसी बड़े निर्णय को कर लेने के बाद भी जब…
पूरा लेख पढ़ेंदत्तजयंति पर विशेष : भगवान दत्तात्रेय के जीवन के अनेक पहलु है जो सामाजिक जीवन में कार्य करनेवाले कार्यकर्ताओ के लिये मार्गदर्शक हैं। दत्तात्रेय…
पूरा लेख पढ़ेंकर्मयोग 8: आठवी कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची ने पत्र में पूछा, ‘‘भैया ये आसक्ति क्या होती है?’’ सुसंस्कृत परिवार था। घर में पाठ,…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -8 ‘असम्भव! ये हमसे नहीं होगा!’ युवाओं के सामने चुनौति रखने पर पहली बार ऐसी प्रतिक्रिया पाने की उनको आदत…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -7 ‘घास का तिनका कैसे उगता है?’ केन्द्र के आवासीय व्यक्तित्व विकास शिविर में आये जिज्ञासु बालक ने कार्यकर्ता को…
पूरा लेख पढ़ेंकर्मयोग 7: स्वधर्म पर आधारित कर्म से ही जीवन में परिपूर्णता एवं संतुष्टि प्राप्त हो सकती है। यही गीता का संदेश है। इसको जीवन…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -6 एक कविहृदय व्यक्ति एक घने जंगल में गया। देखा तो चारों ओर विविधता से नटा संसार। कहीं गगनचुम्बी वृक्ष…
पूरा लेख पढ़ेंकर्मयोग 6: चंगु की अच्छी खासी नौकरी है, ठीक ठाक कमाई भी। स्नेहमय, सुखी, समझदार, सहयोगी परिवार; तेजस्वी, प्रखर बुद्धि, आज्ञाकारी पुत्र भी है।…
पूरा लेख पढ़ेंToday I am sharing one rare experience with all of you. It is a very pleasing experience for a change. With a simple combination…
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