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सामयिक टिप्पणी

अन्नदाता पर कृपा रहे धान्यलक्ष्मी की, ना बने अन्न विक्रेता

धान्यलक्ष्मी की कृपा भारत पर बनी रहे। वर्तमान व्यवस्था आदर्श अथवा धार्मिक तो नहीं है किंतु दिशा उचित है। इस नवरात्रि स्वाध्याय के माध्यम…

25 September 2025 Mukul Kanitkar
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सनातन विकास प्रतिमान

धान्यलक्ष्मी का आशिर्वाद भरे अन्न भांडार

अष्टलक्ष्मी में तीसरी है धान्यलक्ष्मी। यह अन्न की देवी है। इनका स्वरूप भी पोषणकर्ता है। वस्त्र हरित हैं। आठ भुजाओं में धान की बाली,…

24 September 2025 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

धन अर्थात् जोड़ना

धनलक्ष्मी की उपासना मनुष्य को उत्पादक बनाती है। जो भी उसे प्राप्त होता है उसका मूल्यवर्द्धन करना ही धन का उपार्जन है। अपने ज्ञान,…

23 September 2025 Mukul Kanitkar
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सनातन विकास प्रतिमान

संतुलित विकास समुत्कर्ष की देवी आदिलक्ष्मी

आदिलक्ष्मी की उपासना अभ्युदय से अधिक निःश्रेयस अर्थात् आंतरिक उन्नति का प्रसाद भी प्रदान करती है। अतः अर्थतंत्र में भी उपभोग में संयम अथवा…

22 September 2025 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

गण संस्कृति का महोत्सव गणतंत्र दिवस

यह देश का दुर्भाग्य ही है कि स्वतंत्रता के बाद हमारे इन प्रचण्ड ऐतिहासिक अनुभूतियों को पूर्णतः दुर्लक्षित कर हमने विदेशी विचारों पर आधारित…

26 January 2025 Mukul Kanitkar
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सनातन विकास प्रतिमान

केंद्रीकरण और एकाधिकार से जन्मी भयावह आर्थिक विषमता

प्रतिस्पर्धा के कारण एकाधिकार (Monopoly) का प्रयास वर्तमान मुक्त बाज़ार आधारित विकास प्रतिमान का अनिवार्य परिणाम है। लाभ बढ़ाना ही विकास का परिमाण होने…

8 September 2023 Mukul Kanitkar
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