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भावशुद्धि से ही ज्ञान का साक्षात्कार

जैसे बीज में पूरा विश्व छिपा होता है वैसे ही मनुष्य में पूर्णत्व संभावना के रूप में विद्यमान होता है। शिक्षा का लक्ष्य है…

29 September 2022 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

धर्मानुसारी शिक्षा की स्थापना में शिक्षकों की भूमिका

मानव की पहचान संबंधों से है | बिना संबंधों के मनुष्य का कोई परिचय ही नहीं है | समस्त सृष्टि के अन्तर्निहित एकत्व का…

4 April 2016 Mukul Kanitkar
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आलेख

बहुआयामी धर्म की एकात्म संकल्पना

किसी भी राष्ट्र में सामाजिक, राजनैतिक समस्याओके मूल में वैचारिक अस्पष्टता की बहुत बडी भूमिका रहती है। भारत में ब्रिटिष राज के अवषेष आज…

23 December 2015 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

चुनावी रणभूमी मे राष्ट्रवाद का शंखनाद

चुनाव लोकतंत्र का महोत्सव है। वर्तमान में चुनाव आयोग द्वारा डाले गये कठोर निर्बंधों के कारण इस महोत्सव का उत्साह कुछ धीमा पड गया दिखता…

29 November 2013 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

हिन्दू नववर्ष ही वास्तविक नववर्ष

विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक कालगणना का नववर्ष है वर्षप्रतिपदा। वर्षप्रतिपदा, गुढ़ीपाड़वा, नवसंवत्सर, संवत्सरी, चेट्रीचंद आदि नामों से मनाया जानेवाला यह वर्ष के स्वागत का…

10 April 2013 Mukul Kanitkar
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