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संगठन विज्ञान

30 लेख

sangathan

संगठन विकास और विस्तार के ‘स’कारात्मक सूत्र

सम्पर्क प्रत्येक कार्यकर्ता का नित्य कार्य है। कोई भी दिन इसके बिना नहीं हो सकता। संकल्प के साथ संपर्क करने से वह साधना बन…

5 December 2022 Mukul Kanitkar
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शुद्ध वाणी ही सिद्धिदात्री

संस्कृत शब्द का अर्थ ही संस्कारित होता है। स्वरयंत्र से सहज निकलने वाली प्राकृत वाणी का संस्कार होने से वह संस्कृत हो जाती है।…

4 October 2022 Mukul Kanitkar
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आलेख

बुद्धि का परिशोधन मेधा से प्रज्ञा तक

महिष मानव के भीतर अवशिष्ट पशुत्व का प्रतीक है सब देवताओं के तेजांश से संगठित माँ कात्यायनी ही उस पर आरूढ़ हो उसका मर्दन…

1 October 2022 Mukul Kanitkar
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आलेख

एकाग्रता और भाव विस्तार से ही अभय

सामन्यतः मन के रूप में सम्बोधित अन्तःकरण में चार करण (instruments) आते है -मन, बुद्धि, चित्त और अहं। एक ही आंतरिक व्यवस्था जिसे गीता…

30 September 2022 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

दायित्वबोध की देवी हम करे आराधन

दायित्व: देवी भागवत में शुम्भ-निशुम्भ की कथा आती है। ये दोनों मधु-कैटभ के ही वंशज है। उनके वध का प्रतिशोध लेना चाहते है। अपना…

17 October 2018 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

कात्यायनी : कार्यकर्ता निर्माण की कथा

कार्यकर्ताः बड़ी प्रचलित कहावत है, ‘‘भगतसिंह पैदा तो हो पर पड़ौसी के घर में।’’ देशभक्तों की सब प्रशंसा तो करते है पर उनके बनने…

16 October 2018 Mukul Kanitkar
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