एकाग्रता और भाव विस्तार से ही अभय
सामन्यतः मन के रूप में सम्बोधित अन्तःकरण में चार करण (instruments) आते है -मन, बुद्धि, चित्त और अहं। एक ही आंतरिक व्यवस्था जिसे गीता…
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पूरा लेख पढ़ेंदायित्व: देवी भागवत में शुम्भ-निशुम्भ की कथा आती है। ये दोनों मधु-कैटभ के ही वंशज है। उनके वध का प्रतिशोध लेना चाहते है। अपना…
पूरा लेख पढ़ेंकार्यकर्ताः बड़ी प्रचलित कहावत है, ‘‘भगतसिंह पैदा तो हो पर पड़ौसी के घर में।’’ देशभक्तों की सब प्रशंसा तो करते है पर उनके बनने…
पूरा लेख पढ़ेंकेवल ध्येय और विचार ही उदात्त होने से काम नहीं चलता, संगठन के सामने दृष्टि भी उदार होना आवश्यक है। बड़े लक्ष्य लेकर…
पूरा लेख पढ़ेंपहले रात्री की देवी है – शैलपुत्री। हिमालय की पुत्री होने के नाते माँ पार्वती का ही यह नाम है। हिमवान की पुत्री…
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