अन्नदाता पर कृपा रहे धान्यलक्ष्मी की, ना बने अन्न विक्रेता
धान्यलक्ष्मी की कृपा भारत पर बनी रहे। वर्तमान व्यवस्था आदर्श अथवा धार्मिक तो नहीं है किंतु दिशा उचित है। इस नवरात्रि स्वाध्याय के माध्यम…
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धान्यलक्ष्मी की कृपा भारत पर बनी रहे। वर्तमान व्यवस्था आदर्श अथवा धार्मिक तो नहीं है किंतु दिशा उचित है। इस नवरात्रि स्वाध्याय के माध्यम…
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Dhanyalakshmi is the third of the Ashtalakshmi (eight Lakshmis). She is the Goddess of grains. She has the form of a nourisher, attired in…
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अष्टलक्ष्मी में तीसरी है धान्यलक्ष्मी। यह अन्न की देवी है। इनका स्वरूप भी पोषणकर्ता है। वस्त्र हरित हैं। आठ भुजाओं में धान की बाली,…
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The reverence of Dhanalakshmi makes man productive. Augmentation of whatever resources a man possesses, can be conceptualised as the procurement of wealth. This appreciation…
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धनलक्ष्मी की उपासना मनुष्य को उत्पादक बनाती है। जो भी उसे प्राप्त होता है उसका मूल्यवर्द्धन करना ही धन का उपार्जन है। अपने ज्ञान,…
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आदिलक्ष्मी की उपासना अभ्युदय से अधिक निःश्रेयस अर्थात् आंतरिक उन्नति का प्रसाद भी प्रदान करती है। अतः अर्थतंत्र में भी उपभोग में संयम अथवा…
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श्राद्ध का सबसे बड़ा तत्त्व है पितरों के प्रति श्रद्धा। उस श्रद्धा का व्यवहार में प्रयोग त्याग द्वारा ही संभव है। जिनके प्रति सम्मान…
पूरा लेख पढ़ेंकाल की वैज्ञानिक समझ से ही वर्षप्रतिपदा को सालभर के साढ़े तीन मुहुर्तों में से एक मानते हैं। यह पूर्ण मुहुर्त है। इस दिन शुभकार्य…
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महिला नेतृत्व ही मानवता के समग्र कल्याण का मार्ग है। सर्वांगीण विकास भी प्रत्यक्ष महिलाओं अथवा नारीत्व के गुणों से परिपूर्ण नेतृत्व द्वारा ही…
पूरा लेख पढ़ेंपितरों के उद्धार के लिए श्राद्ध में श्रद्धा ना भी हो तब भी आत्मोद्धार के लिये श्राद्ध अवश्य करें। भाद्रपद मास उत्तरायण के मध्य…
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