धान्यलक्ष्मी का आशिर्वाद भरे अन्न भांडार
अष्टलक्ष्मी में तीसरी है धान्यलक्ष्मी। यह अन्न की देवी है। इनका स्वरूप भी पोषणकर्ता है। वस्त्र हरित हैं। आठ भुजाओं में धान की बाली,…
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अष्टलक्ष्मी में तीसरी है धान्यलक्ष्मी। यह अन्न की देवी है। इनका स्वरूप भी पोषणकर्ता है। वस्त्र हरित हैं। आठ भुजाओं में धान की बाली,…
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The reverence of Dhanalakshmi makes man productive. Augmentation of whatever resources a man possesses, can be conceptualised as the procurement of wealth. This appreciation…
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धनलक्ष्मी की उपासना मनुष्य को उत्पादक बनाती है। जो भी उसे प्राप्त होता है उसका मूल्यवर्द्धन करना ही धन का उपार्जन है। अपने ज्ञान,…
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The worship of Adilakshmi endows the Prasada of Nihshreyasa (Inner Growth) more than Abhyudaya, the material development. Controlled or contained consumption has been the…
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आदिलक्ष्मी की उपासना अभ्युदय से अधिक निःश्रेयस अर्थात् आंतरिक उन्नति का प्रसाद भी प्रदान करती है। अतः अर्थतंत्र में भी उपभोग में संयम अथवा…
पूरा लेख पढ़ेंकाल की वैज्ञानिक समझ से ही वर्षप्रतिपदा को सालभर के साढ़े तीन मुहुर्तों में से एक मानते हैं। यह पूर्ण मुहुर्त है। इस दिन शुभकार्य…
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महिला नेतृत्व ही मानवता के समग्र कल्याण का मार्ग है। सर्वांगीण विकास भी प्रत्यक्ष महिलाओं अथवा नारीत्व के गुणों से परिपूर्ण नेतृत्व द्वारा ही…
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केवल दीपोत्सव नहीं केवल प्रसन्न (happy) नहीं केवल शुभ कामना या इच्छा से नहीं मनाया जा सकता है संकल्प से पराक्रम, उद्यम, संगठन कल्याण,…
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इस नवरात्रि वैचारिक क्षेत्र का स्वाध्याय हम कर रहे हैं, उस संदर्भ में सिद्धिदात्री से किन सिद्धियों की अपेक्षा करनी उस पर मंथन करते…
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एक जन, एक मन से एक ध्येय की और भिन्न भिन्न मार्गों से अग्रसर होते हुए एक अंतःकरण से सामूहिक और व्यक्तिगत गौरव, वैभव…
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