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दुर्गा

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सनातन विकास प्रतिमान

धान्यलक्ष्मी का आशिर्वाद भरे अन्न भांडार

अष्टलक्ष्मी में तीसरी है धान्यलक्ष्मी। यह अन्न की देवी है। इनका स्वरूप भी पोषणकर्ता है। वस्त्र हरित हैं। आठ भुजाओं में धान की बाली,…

24 September 2025 Mukul Kanitkar
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धन अर्थात् जोड़ना

धनलक्ष्मी की उपासना मनुष्य को उत्पादक बनाती है। जो भी उसे प्राप्त होता है उसका मूल्यवर्द्धन करना ही धन का उपार्जन है। अपने ज्ञान,…

23 September 2025 Mukul Kanitkar
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सनातन विकास प्रतिमान

संतुलित विकास समुत्कर्ष की देवी आदिलक्ष्मी

आदिलक्ष्मी की उपासना अभ्युदय से अधिक निःश्रेयस अर्थात् आंतरिक उन्नति का प्रसाद भी प्रदान करती है। अतः अर्थतंत्र में भी उपभोग में संयम अथवा…

22 September 2025 Mukul Kanitkar
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हिंदू नववर्ष ही साक्षात् नववर्ष

काल की वैज्ञानिक समझ से ही वर्षप्रतिपदा को सालभर के साढ़े तीन मुहुर्तों में से एक मानते हैं। यह पूर्ण मुहुर्त है। इस दिन शुभकार्य…

30 March 2025 Mukul Kanitkar
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लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई

महिला नेतृत्व ही मानवता के समग्र कल्याण का मार्ग है। सर्वांगीण विकास भी प्रत्यक्ष महिलाओं अथवा नारीत्व के गुणों से परिपूर्ण नेतृत्व द्वारा ही…

8 March 2025 Mukul Kanitkar
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शुभ संकल्प का उत्सव

केवल दीपोत्सव नहीं केवल प्रसन्न (happy) नहीं केवल शुभ कामना या इच्छा से नहीं मनाया जा सकता है संकल्प से पराक्रम, उद्यम, संगठन कल्याण,…

12 November 2023 Mukul Kanitkar
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वैचारिक प्रबोधन की साधना 

इस नवरात्रि वैचारिक क्षेत्र का स्वाध्याय हम कर रहे हैं, उस संदर्भ में सिद्धिदात्री से किन सिद्धियों की अपेक्षा करनी उस पर मंथन करते…

23 October 2023 Mukul Kanitkar
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राष्ट्ररक्षा का सनातन संकल्प स्कन्दमाता की उपासना

एक जन, एक मन से एक ध्येय की और भिन्न भिन्न मार्गों से अग्रसर होते हुए एक अंतःकरण से सामूहिक और व्यक्तिगत गौरव, वैभव…

19 October 2023 Mukul Kanitkar
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