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Mukul Kanitkar

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सामयिक टिप्पणी

धर्मानुसारी शिक्षा की स्थापना में शिक्षकों की भूमिका

मानव की पहचान संबंधों से है | बिना संबंधों के मनुष्य का कोई परिचय ही नहीं है | समस्त सृष्टि के अन्तर्निहित एकत्व का…

4 April 2016 Mukul Kanitkar
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आलेख

बहुआयामी धर्म की एकात्म संकल्पना

किसी भी राष्ट्र में सामाजिक, राजनैतिक समस्याओके मूल में वैचारिक अस्पष्टता की बहुत बडी भूमिका रहती है। भारत में ब्रिटिष राज के अवषेष आज…

23 December 2015 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

पुरस्कार वापसी का राजनैतिक अरण्य रुदन

प्रश्न यह है कि साहित्यकारों ने माहौल बनाना है या माहौल के अनुसार चलना है | कहते है कि साहित्य समाज का दर्पण है…

27 October 2015 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

एकात्म स्वावलंबी ग्राम विकास

अनेक विद्यालयों के द्वार पर लिखा होता है ‘ज्ञानार्थ प्रवेश-सेवार्थ प्रस्थान’ | यह शिक्षा के समग्र उद्दिष्ट का नित्य स्मरण है | केवल ज्ञानप्राप्ति…

24 October 2015 Mukul Kanitkar
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तंत्रनिकेतन नव्हे तंत्रशिक्षणाचा सर्वंकष विचार

गेल्या काही दिवसांपासून अभियांत्रिकी शिक्षणाबद्दल काही वेगळीच चर्चा सुरू झाली आहे. काही दिवसांपूर्वी महाराष्ट्राच्या शिक्षणमंत्र्यांनी केलेल्या विधानावर तरुण भारतात श्रीधर हरकरे यांनी ‘डिप्लोमा इंजिनीयरिंगचा…

16 April 2015 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

एस्पायर सार्वजनिक विद्यालय की अभिनव शिक्षण पद्धति

न्यूयॉर्क टाइम्स में लेख का सारांश अमेरिका स्तिथित एस्पायर सार्वजनिक विद्यालय अध्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम पारम्परिक शिक्षण व्यवस्था से बहुत अलग है | यहाँ पर…

8 February 2015 Mukul Kanitkar
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