We the people …

Mukul Kanitkar 2 मिनट का पठन

Brooding over our Constitution of India or  भारत का संविधान

It is now 6 decades of our constitution. Time to evaluate the functioning of the same. Naturally we will have to go into the genesis and historical evolution of it. But primarily one would like to keep the focus on the future. Do we need a change. some cosmetic amendments would suffice or there is a need for a fresh constituent assembly to deal with the present and future challenges?

Please feel free to share your thoughts. You need not be a legal expert. What we need is your expectations from the constitution of this great nation poised today for a greater role in the Global geo-politics and economics. Then we can examine whether these can be fulfilled in the present framework or need fresh provisions or even basic change.

Hope this becomes a forum for free discussion.

भारत के संविधान को अब ६० साल हो रह है| निश्चित ही यह आत्मावलोकन का समय है| क्या पाया क्या रह गया? दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि स्थानिक परिप्रेक्ष्य और वैश्विक परिदृश्य दोनों ही पुरे बदल गए है| तो इनके साथ राष्ट्र कि विश्वकुटुंब में भूमिका भी बदलनी होगी| उभरते भारत कि अभीप्साओं कि पूर्ति के लिए कैसा संविधान आवश्यक है? क्या वर्तमान संविधान में कुछ नए संशोधन पर्याप्त होंगे या समय आ गया है कि अपनी राष्ट्रीय ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, अध्यात्मिक चेतना व अनुभूति के अनुरूप नए संविधानिक ढांचे की रचना के लिए पुनः सभा सजाई जाये ?

अपनी अपेक्षाएं तो स्पष्ट कर ले अपने राष्ट्र से और उसी खातिर अपने संविधान से…

लिखे अपनी अपेक्षाओं को खुलकर| बनादे इस पृष्ठ को एक खुला मंच चर्चा का| चाणक्य के देश के लोग क्या अपना संविधान नहीं रच सकते? उत्तरापथ इसी वैचारिक यात्रा का नाम है- तक्षशिला जैसे ज्ञानक्षेत्र से मगध के राजसभा तक का पथ| आइये अपने पुरातन पवन पाथेय को पुनः टटोले |

फिर नन्द का विनाशक स्वार्थी शासन ललकार रहा | आओ फिर छोटी की गठन खोले फिर चन्द्रगुप्त के लिए मार्ग प्रशस्त करें| अपनी वाणी, बुद्धि और लेखनी से…

Mukul Kanitkar

लेखक

Mukul Kanitkar

भारतीय संस्कृति, समाज, शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्रजीवन पर लेखन।

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5 Comments

  1. सहमत। बंधुवर थोड़ा समय निकाल कर भारत राष्‍ट्रीय परिवार द्वारा प्रस्‍तावित चुनाव प्रणाली एवं अपरिग्रह क्रान्ति का अध्‍ययन करें.. और हमें अपने विचारों से ईमेल पर भी अवगत करायें..

    • क्या हम यह लेख भाषान्तर करके उपयोग कर सकते है?

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