उत्तरापथ संग्रह

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भारतीय चिंतन, संस्कृति, समाज, शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्रजीवन पर प्रकाशित सभी लेख।

244 लेख

सामयिक टिप्पणी

साम्प्रदायिकता का तुष्टीकरण सबसे बड़ा भ्रष्टाचार

मानो इतिहास अपने आप को दोहरा रहा था। लोग और आंदोलन कर्ता भी जिसे आजादी की दूसरी लड़ाई कह रहे थे वह भी वास्तविक…

14 September 2011 Mukul Kanitkar
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चरित्र

भगीनी निवेदिता का मातृमन्त्र – भारत भक्ति ही सच्चा धर्म

रामकृष्ण मठ चेन्नई से प्रकाशित सितम्बर 2011 के वेदान्त केसरी में श्री प्रमथ रंजन पाल के अनुभवों पर आधारित आलेख छपा है। उसका यह…

4 September 2011 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

अण्णा आंदोलन का जमा-खर्च

29 अगस्त के न्यू इण्डियन एक्स्प्रेस में स्वदेशी चिंतक श्री एस् गुरुमूर्ति जी का लेख छपा है। हिन्दी पाठकों की सुविधा हेतु सारांश सहित…

31 August 2011 Mukul Kanitkar
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योग

कर्मयोग का व्यावहारिक मार्ग : विकर्म

मानव को कर्म की स्वतन्त्रता है। कहते है कि अन्य प्राणियों को यह स्वाधीनता नहीं है। उनके कर्म तय कार्यक्रम के अनुसार ही चल…

30 August 2011 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

अन्नागिरी कही फिर गांधीगिरी ही न बन जाये??

अन्ना के अनशन का ८ व दिन है| सरकार कि संवेदनहीनता और मीडिया के जोरदार प्रसारण ने आन्दोलन को जबरदस्त प्रतिसाद मिल रहा है|…

23 August 2011 Mukul Kanitkar
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सामयिक टिप्पणी

मार्क्सवादी अब संग्रहालय की वस्तुयें

आज के न्यू इण्डियन एक्सप्रेस के सम्पादकीय पृष्ठपर माननीय परमेश्वरन जी का लेख छपा है- ‘‘मार्क्सवादी अब संग्रहालय की वस्तुयें’’। हिन्दी पाठकों की सुविधा…

30 July 2011 Mukul Kanitkar
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