अभ्यास भैया अभ्यास!
गढ़े जीवन अपना अपना -16 आधी रात का समय था। हस्तिनापुर के प्रासाद में सब ओर शांति थी। अर्जुन को लघुशंका के लिये जाना…
पूरा लेख पढ़ेंसंबंधित लेख
51 लेख
गढ़े जीवन अपना अपना -16 आधी रात का समय था। हस्तिनापुर के प्रासाद में सब ओर शांति थी। अर्जुन को लघुशंका के लिये जाना…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -15 चरित्र निर्माण के बाहरी आयामों में चौथा व अंतिम है – कौशल। शारीरिक बल, रूप ओर स्वास्थ्य के साथ…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -14 आद्य क्रांतिकारी वासुदेव बलवन्त फडके को जेल में बंद रखना भी सम्भव नहीं था। जेल से भागने के लिये…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -13 “बताओ! गुलाब क्यों सुन्दर होता है?” कुलकर्णी सर थे तो अंग्रजी के शिक्षक पर उनकी आदत थी कि कक्षा…
पूरा लेख पढ़ेंकर्मयोग 10: ‘‘हर कोई सफल होना चाहता है। पर क्या यह सम्भव है? आपकी गीता क्या कहती है?’’ युवाओं की जिज्ञासायें विद्रोह के आवरण…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -10 एक गुरुकुल में दो शिष्य थे सुहृत और सुकृत। सुकृत बड़ा विद्वान था। जो भी पाठ पढ़ाया जाता तुरन्त…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -9 छलांग तो लगानी ही पड़ती है। साधारणतः जीवन में किसी बड़े निर्णय को कर लेने के बाद भी जब…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -6 एक कविहृदय व्यक्ति एक घने जंगल में गया। देखा तो चारों ओर विविधता से नटा संसार। कहीं गगनचुम्बी वृक्ष…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -5 चार्ल्स की उर्जा को दिशा देना उसकी माँ के बस का नहीं था। 10 साल का बालक और इतने…
पूरा लेख पढ़ेंगढ़े जीवन अपना अपना -4 एक बार शरीर के सारे अंगों में विवाद हो गया। पांव कहने कहने लगे ‘हम ही श्रेष्ठ है। हमारे…
पूरा लेख पढ़ें