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कविता

फिर फूंको पांचजन्य ! फिर सुनाओ गीता !!

आज भ्रमित अर्जुन विषादग्रस्त नहीं आक्रोशित है। तमस नहीं आज रजस का प्रकोप है। अपने में सिमटा सकुचा, परास्त नहीं आज का अर्जुन, संख्याबल…

24 December 2012 Mukul Kanitkar
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