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चुनावी रणभूमी मे राष्ट्रवाद का शंखनाद

चुनाव लोकतंत्र का महोत्सव है। वर्तमान में चुनाव आयोग द्वारा डाले गये कठोर निर्बंधों के कारण इस महोत्सव का उत्साह कुछ धीमा पड गया दिखता…

29 November 2013 Mukul Kanitkar
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केवल पर्दा उठने की ही देरी है

गत सप्ताह भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दो ऐतिहासिक निर्णय दिये। किसी भी लोकसेवक के विरूद्ध अभियोजन के लिये सरकार की अनुमति का प्रावधान…

8 February 2012 Mukul Kanitkar
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अन्नागिरी कही फिर गांधीगिरी ही न बन जाये??

अन्ना के अनशन का ८ व दिन है| सरकार कि संवेदनहीनता और मीडिया के जोरदार प्रसारण ने आन्दोलन को जबरदस्त प्रतिसाद मिल रहा है|…

23 August 2011 Mukul Kanitkar
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बाबा और अण्णा के आंदोलन से उपजे प्रश्न?

देश परिवर्तन चाहता है। चाहे अण्णा का आंदोलन हो या बाबा का जिस उत्साह से लाखों भारतीय इस आन्दोलन में कूद पड़े वो इस…

13 June 2011 Mukul Kanitkar
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