रंगोत्सव नहीं होली है धर्मोत्सव
होलिका है धर्म रक्षा का आत्मोत्सव वसंत के आह्लाद का आनंदोत्सव फाग के राग का संगीतमय स्वरोत्सव समरस समाज का एकात्म भावोत्सव ऋतुपरिवर्तन का…
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होलिका है धर्म रक्षा का आत्मोत्सव वसंत के आह्लाद का आनंदोत्सव फाग के राग का संगीतमय स्वरोत्सव समरस समाज का एकात्म भावोत्सव ऋतुपरिवर्तन का…
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एक जन, एक मन से एक ध्येय की और भिन्न भिन्न मार्गों से अग्रसर होते हुए एक अंतःकरण से सामूहिक और व्यक्तिगत गौरव, वैभव…
पूरा लेख पढ़ेंसमृद्धि व संस्कृति की समान उपासना करनेवाले विश्वगुरु भारत का स्वप्न यदि हम साकार करना चाहते हैं तो स्वामीजी के आवृत्त उपहारों का अनुसंधान…
पूरा लेख पढ़ेंआज तप अर्थात् Research को केवल उच्च शिक्षा का अंग बनाया गया है। तप और शुद्धि ही हर स्तर की शिक्षण विधि है। विधि…
पूरा लेख पढ़ेंWhat was the purpose of Swami Vivekananda’s life? Though it may be deemed arrogant to ask such a question, for those who want to…
पूरा लेख पढ़ेंजब समूचा राष्ट्र ही अपनी निहित शक्तियों के प्रति अनभिज्ञ होने के कारण आत्मग्लानि से ग्रस्त हो जाता है तब कोई अद्वितीय विजय ही…
पूरा लेख पढ़ेंआज विज्ञान भी किसी सम्प्रदाय से कम नहीं रहा है। वैज्ञानिक अपनी अधूरी मान्यताओं को भी किसी साम्प्रदायिक विश्वास के समान ही सब पर…
पूरा लेख पढ़ें‘‘माँ आज मुझे किसी से प्यार हो गया है ।’’ एक शाम स्वामी विवेकानन्द ने साराह ओले बुल को कहाँ, जिन्हें वे मेरी ममतामयी…
पूरा लेख पढ़ें१९८५ मध्ये भारत सरकारने विचार केला की, पूर्ण देशात एक दिवस तरूणांकरिता असावा. जसा महिला दिन, बाल दिवस तसाच युवा दिवस. शोधाशोध सुरू झाली…
पूरा लेख पढ़ेंस्वामी विवेकानंद के राष्ट्र चिंतन के प्रथम दिन : प्रश्न आस्था का है । मनुष्य आस्था के बल पर कुछ भी चमत्कार कर सकता…
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