दिग्विजय से पाएं विश्वविजय की प्रेरणा
जब समूचा राष्ट्र ही अपनी निहित शक्तियों के प्रति अनभिज्ञ होने के कारण आत्मग्लानि से ग्रस्त हो जाता है तब कोई अद्वितीय विजय ही…
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जब समूचा राष्ट्र ही अपनी निहित शक्तियों के प्रति अनभिज्ञ होने के कारण आत्मग्लानि से ग्रस्त हो जाता है तब कोई अद्वितीय विजय ही…
पूरा लेख पढ़ेंTo The Fourth Of July by Swami Vivekananda (From The Complete Works of Swami Vivekananda, Vol5 Page 440. It is well known that Swami…
पूरा लेख पढ़ेंराम अर्थात मूर्तिमान धर्म। वाल्मिकी रामायण में कहा है – रामो विग्रहवान धर्म! जीवन के प्रत्येक समय में श्रीराम ने धर्म का पालन किया।…
पूरा लेख पढ़ेंविश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक कालगणना का नववर्ष है वर्षप्रतिपदा। वर्षप्रतिपदा, गुढ़ीपाड़वा, नवसंवत्सर, संवत्सरी, चेट्रीचंद आदि नामों से मनाया जानेवाला यह वर्ष के स्वागत का…
पूरा लेख पढ़ेंThis is published in Organiser April 14 issue. http://www.organiser.org/Encyc/2013/4/6/Be-the-Change.aspx?NB=&lang=4&m1=&m2=&p1=&p2=&p3=&p4=&PageType=N THE crime rate in the cities is on the rise. They blame it on unemployment.…
पूरा लेख पढ़ेंसमाज हिरण्यकश्यपुओं से भर गया है। हिरण्य के दो अर्थ है – एक है स्वर्ण और दूसरा है चमकनेवाला। धन और दिखावे के प्रति…
पूरा लेख पढ़ें‘‘माँ आज मुझे किसी से प्यार हो गया है ।’’ एक शाम स्वामी विवेकानन्द ने साराह ओले बुल को कहाँ, जिन्हें वे मेरी ममतामयी…
पूरा लेख पढ़ेंजो सूर्यनमस्कार का प्रतिदिन अभ्यास करते हैं, उनको आयु, वीर्य, बल, प्रज्ञा तथा तेज की प्राप्ति होती है और सामूहिक सूर्यनमस्कार के अभ्यास से…
पूरा लेख पढ़ें‘Each nation has a destiny to fulfill, a message to deliver and a Mission to accomplish.’ Swami Vivekananda proclaimed at Madurai after his triumphant…
पूरा लेख पढ़ेंस्वामी विवेकानन्द विश्वात्मा थे। उन्होंने सृष्टि की एकात्मता का अनुभव किया था। अमेरिका में सहस्त्रद्विपोद्यान (Thousand Island Park) में अपने अंतरंग शिष्यों कें…
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