अंतरतम के प्रह्लाद की खोज का पर्व: होली
समाज हिरण्यकश्यपुओं से भर गया है। हिरण्य के दो अर्थ है – एक है स्वर्ण और दूसरा है चमकनेवाला। धन और दिखावे के प्रति…
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समाज हिरण्यकश्यपुओं से भर गया है। हिरण्य के दो अर्थ है – एक है स्वर्ण और दूसरा है चमकनेवाला। धन और दिखावे के प्रति…
पूरा लेख पढ़ेंगत दोन वर्षांचा अनुभव दिसतो की भारताच्या नवशिक्षित युवकांमध्ये जागृति आली आहे. मोर्चे, आंदोलन उपोषणात तरूणांची संख्या वाढतेच आहे. दूसरीकडे कावड, पदयात्रा, किर्तन, कथा,…
पूरा लेख पढ़ें‘‘माँ आज मुझे किसी से प्यार हो गया है ।’’ एक शाम स्वामी विवेकानन्द ने साराह ओले बुल को कहाँ, जिन्हें वे मेरी ममतामयी…
पूरा लेख पढ़ेंजो सूर्यनमस्कार का प्रतिदिन अभ्यास करते हैं, उनको आयु, वीर्य, बल, प्रज्ञा तथा तेज की प्राप्ति होती है और सामूहिक सूर्यनमस्कार के अभ्यास से…
पूरा लेख पढ़ें१९८५ मध्ये भारत सरकारने विचार केला की, पूर्ण देशात एक दिवस तरूणांकरिता असावा. जसा महिला दिन, बाल दिवस तसाच युवा दिवस. शोधाशोध सुरू झाली…
पूरा लेख पढ़ें‘Each nation has a destiny to fulfill, a message to deliver and a Mission to accomplish.’ Swami Vivekananda proclaimed at Madurai after his triumphant…
पूरा लेख पढ़ेंस्वामी विवेकानन्द विश्वात्मा थे। उन्होंने सृष्टि की एकात्मता का अनुभव किया था। अमेरिका में सहस्त्रद्विपोद्यान (Thousand Island Park) में अपने अंतरंग शिष्यों कें…
पूरा लेख पढ़ेंश्री रामकृष्ण-विवेकानन्द भावधारा में 1 जनवरी को कल्पतरु दिवस के रुप में मनाया जाता है। इसके पीछे के इतिहास को देखने से पहले हम…
पूरा लेख पढ़ेंस्वामी विवेकानंद के राष्ट्र चिंतन के प्रथम दिन : प्रश्न आस्था का है । मनुष्य आस्था के बल पर कुछ भी चमत्कार कर सकता…
पूरा लेख पढ़ेंआज भ्रमित अर्जुन विषादग्रस्त नहीं आक्रोशित है। तमस नहीं आज रजस का प्रकोप है। अपने में सिमटा सकुचा, परास्त नहीं आज का अर्जुन, संख्याबल…
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