सत्य पथ

Mukul Kanitkar 1 मिनट का पठन

सत्य का पथ
कहते है कि बडा
कन्ट्काकीर्ण होता है
सत्य का पथ !

पर
अनुभव तो है ये कि
सत्यपथ सदाही
मनोहर होता है।

हां बाधायें तो निश्चित
अधिक आयेंगी।
पर हौसला भी तो
औरों से अधिक होगा।
साथी भी भले
संख्या में कम लगे
पर होंगे सच्चे और पक्के।
सत्यपथ के
सहपथिक ही
साथी कहलाते है।

तो साथी कभी
अकेला
ना अनुभव करना।
चाहे देनी पडे
सैंकडों बार
अग्निपरीक्षा !

या किसी  धोबी के
भौंकने से
करना पडे बार बार
वनगमन!

हे मेरे सत्यपथी
छोडना न साथ
सत्य का
तोड़ना न व्रत
धर्म का …

Mukul Kanitkar

लेखक

Mukul Kanitkar

भारतीय संस्कृति, समाज, शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्रजीवन पर लेखन।

लेखक के सभी लेख →

6 Comments

  1. bhaiya ye to pta hi tha ki ap speech or article writing mein unbeatable hai but ap to poetry mein bhi unbeatable hai.
    And i m completely agreed with babulal bhaiya

  2. bhaiya ye to pta hi tha ki ap speech or article writing mein unbeatable hai but ap to poetry mein bhi unbeatable hai.
    And i m completely agreed with babulal bhaiya

  3. जहाँ राम का धनुष उठा हो धर्म की प्राण प्रतिष्ठा में,
    जहाँ कृष्ण ने चक्र चलाया सत्य विजय की निष्ठा में !!
    वसुधा का कल्याण हो जिससे ऋषियों ने वो काम किये,
    सुखी रहे जन जीवन जिससे प्रकृति ने वरदान दिए !!
    जहाँ की मिटटी का कण कण भी हमको ज्ञान सिखाता है,
    वीर प्रसविनी जग की जननी अपनी भारत माता है !!

  4. जहाँ राम का धनुष उठा हो धर्म की प्राण प्रतिष्ठा में,
    जहाँ कृष्ण ने चक्र चलाया सत्य विजय की निष्ठा में !!
    वसुधा का कल्याण हो जिससे ऋषियों ने वो काम किये,
    सुखी रहे जन जीवन जिससे प्रकृति ने वरदान दिए !!
    जहाँ की मिटटी का कण कण भी हमको ज्ञान सिखाता है,
    वीर प्रसविनी जग की जननी अपनी भारत माता है !!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *