मात्रा भेद

Mukul Kanitkar 1 मिनट का पठन

कल तक 
अनन्त के दर्शन से
थे जो विस्मित !
अब आत्मबल विहीन
क्यों हो गये
शंकित?

विस्मयादि बोध ‘!’
के स्थान पर
प्रश्नचिह्न ‘?’
लग गये।

जड़ का चेतन से
देखो कैसा
कार्य-कारण सम्बन्ध . . .
मात्र एक मात्रा के
बदलने से
सारे ‘गुण’
बदल गये !!!

Mukul Kanitkar

लेखक

Mukul Kanitkar

भारतीय संस्कृति, समाज, शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्रजीवन पर लेखन।

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