चुनावी रणभूमी मे राष्ट्रवाद का शंखनाद
चुनाव लोकतंत्र का महोत्सव है। वर्तमान में चुनाव आयोग द्वारा डाले गये कठोर निर्बंधों के कारण इस महोत्सव का उत्साह कुछ धीमा पड गया दिखता…
पूरा लेख पढ़ेंउत्तरापथ संग्रह
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चुनाव लोकतंत्र का महोत्सव है। वर्तमान में चुनाव आयोग द्वारा डाले गये कठोर निर्बंधों के कारण इस महोत्सव का उत्साह कुछ धीमा पड गया दिखता…
पूरा लेख पढ़ेंअर्थशास्त्र के नोबल पुरस्कारों की घोषणा हुई और कुछ वर्ष पूर्व देखे हिन्दी सिनेमा ‘फुकरे’ की याद आ गई। वर्ष 2013 में अमेरिका के…
पूरा लेख पढ़ेंकेवल ध्येय और विचार ही उदात्त होने से काम नहीं चलता, संगठन के सामने दृष्टि भी उदार होना आवश्यक है। बड़े लक्ष्य लेकर…
पूरा लेख पढ़ेंपहले रात्री की देवी है – शैलपुत्री। हिमालय की पुत्री होने के नाते माँ पार्वती का ही यह नाम है। हिमवान की पुत्री…
पूरा लेख पढ़ेंजब समूचा राष्ट्र ही अपनी निहित शक्तियों के प्रति अनभिज्ञ होने के कारण आत्मग्लानि से ग्रस्त हो जाता है तब कोई अद्वितीय विजय ही…
पूरा लेख पढ़ेंTo The Fourth Of July by Swami Vivekananda (From The Complete Works of Swami Vivekananda, Vol5 Page 440. It is well known that Swami…
पूरा लेख पढ़ेंआज विज्ञान भी किसी सम्प्रदाय से कम नहीं रहा है। वैज्ञानिक अपनी अधूरी मान्यताओं को भी किसी साम्प्रदायिक विश्वास के समान ही सब पर…
पूरा लेख पढ़ेंराम अर्थात मूर्तिमान धर्म। वाल्मिकी रामायण में कहा है – रामो विग्रहवान धर्म! जीवन के प्रत्येक समय में श्रीराम ने धर्म का पालन किया।…
पूरा लेख पढ़ेंविश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक कालगणना का नववर्ष है वर्षप्रतिपदा। वर्षप्रतिपदा, गुढ़ीपाड़वा, नवसंवत्सर, संवत्सरी, चेट्रीचंद आदि नामों से मनाया जानेवाला यह वर्ष के स्वागत का…
पूरा लेख पढ़ेंThis is published in Organiser April 14 issue. http://www.organiser.org/Encyc/2013/4/6/Be-the-Change.aspx?NB=&lang=4&m1=&m2=&p1=&p2=&p3=&p4=&PageType=N THE crime rate in the cities is on the rise. They blame it on unemployment.…
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